जानिये सफलता पाने के मंत्र J.E.E. मुख्य परीक्षा टॉपर की जुबानी

कड़ी मेहनत, दूर दृष्टि और पक्का इरादा प्रत्येक व्यक्ति को रंक से राजा या असफल से सफल बना सकता है। कोई भी व्यक्ति जो अपने जीवन में अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहता है वह इन तीनों शब्दों पर आधारित जीवन यापन करते हुए अपने मकसद को प्राप्त कर सकता है। दूर दृष्टि अर्थात जीवन में क्या बनना है, पक्का इरादा का मतलब है एक बार जो सोच लिया उसे पूरा करके ही छोड़ना और उस लक्ष्य को हासिल करने में जितनी भी कड़ी मेहनत करनी पड़े उतनी मेहनत करना। कुछ ऐसा ही करिश्मा जे.ई.ई. मुख्य परीक्षा 2017 के टॉपर कल्पित वीरवल ने कर दिखाया है।

कल्पित ने माता-पिता के सपनों को किया पूरा
 कल्पित वीरवल ने कड़ी मेहनत के द्वारा न सिर्फ अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाया, बल्कि अपने माता-पिता के सपनों को भी पूरा कर दिखाया। एक बहुत ही साधारण से मेल नर्स पुष्करलाल वीरवल और शिक्षिका पुष्पा वीरवल के बेटे कल्पित वीरवल ने जे.ई.ई. मुख्य परीक्षा 2017 में 360 में से 360 अंक प्राप्त किए।
कल्पित की महत्वपूर्ण सफलताएं
 छात्र कल्पित वीरवल ने अपनी सफलता की पूरी कहानी बयां की है। उन्होंने कहा कि यह सफलता उनको समर्पण और परिश्रम से मिली है। इससे पहले कल्पित ने 10वीं कक्षा में भी 10/10 सी.जी.पी.ए. हासिल किया था। अपनी मेहनत के बल पर कल्पित ने भौतिकी, गणित एवं रसायन शास्त्र जैसे विषयों में 120 में से 120 नंबर प्राप्त किए। कल्पित ने एन.टी.एस.ई. के प्रथम चरण में भी राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
औसतन रोज़ाना छह घंटे की पढ़ाई जरूरी
 कल्पित का रोल मॉडल उसका बड़ा भाई हार्दिक है जो अभी एम्स में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है। बचपन से ही अच्छी बातों के प्रति जागरूक रहने वाले कल्पित ने कक्षा एवं प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी को कभी रुकने नहीं दिया। कल्पित की मानें तो औसतन रोज़ाना छह घंटे की पढ़ाई कर इस सफलता को प्राप्त किया जा सकता है। एक अलग मुकाम हासिल करने के लिए सभी को सेल्फ स्टडी पर ज़ोर देना चाहिए। कल्पित पहला ऐसा छात्र है जिसने उदयपुर से पहली बार आई.आई.टी परीक्षा में टॉप किया।
कल्पित की सफलता का मंत्र
 17 वर्षीय कल्पित ने सफलता के बारे में अपने विचार प्रकट किए और कहा कि लक्ष्य को लेकर कड़ी मेहनत, सुनियोजित तरीके से पढ़ाई करना और एकाग्रचित रहना जरूरी है। “मेरा संदेश है कि शांत, सुनियोजित रहें और कड़ी मेहनत करें। पूर्ण समर्पण, प्रतिबद्धता और खुद को ‘सोशल मीडिया से दूर रखकर’ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है”।
1. टीवी और सोशल मीडिया-सफलता में बाधा
कल्पित ने ना कभी टीवी देखा, ना सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद किया, ना फेसबुक और वॉट्सऐप पर टाइम पास किया। कल्पित का कहना है -किसी भी कॉम्पिटीशन की तैयारी करने वाले छात्र के लिए ये चीजें नाकामी का कारण बनती हैं और छात्र का ध्यान भटकाती हैं।
2. तनावग्रस्त होने से बचें
पढ़ाई किसी भी छात्र के लिए बोरिंग होती है। मेरे लिए भी थी क्योंकि हफ्ते में पांच दिन कोचिंग जाना होता था। ऐसे में दिमाग में तनाव होना लाज़मी था।
लेकिन छुट्टी के दिन मैं क्रिकेट के लिए थोड़ा समय निकाल लेता था और इससे मेरा मन हलका हो जाता था। इसके साथ मैं म्यूजिक भी सुन लेता था।
3. सभी विषय की एक समान तैयारी जरूरी
कल्पित का कहना है कि भौतिकी हो रसायनशास्त्र या फिर गणित- सभी विषयों को एक समान समय देकर तैयारी करनी चाहिए। गणित में प्रैक्टिस की ज्यादा जरूरत थी तो प्रैक्टिस ज्यादा करता था और फिजिक्स की थ्योरीज को समझने के लिए फोकस होकर बैठता था।
4. रिवीजन और प्रैक्टिस बहुत ही जरूरी
मेरा एक मात्र लक्ष्य आई.आई.टी. में प्रवेश पाना था, इसलिए मैंने पढ़ाई के लिए अपना खास समय तय कर लिया था और उसी समय में मैं रिवीजन, स्पीड और एक्यूरेसी पर फोकस किया करता था। करीब दो साल तक तैयारी के बाद मैंने इसमें अच्छा प्रदर्शन दिखाना शुरू किया।
दूसरों से लें प्रेरणा
 अगर जीवन में सफल होना चाहते हो तो पूरी योजना को सही रूप से अमल में लाने के लिए पढ़ाई को एन्जॉय करो और बेहतर परिणाम के लिए दूसरे छात्रों से प्रेरणा लो।
कम से कम 7 घंटे की नींद
 कल्पित हर रात 11 बजे तक सोने जाया करता था। “परीक्षा से पहले जब कोचिंग और स्कूल बंद हो गए थे तो मेरा रूटीन टूटा और मुझे लगने लगा कि अब मुझसे कुछ नहीं हो पाएगा। ऐसे में मुझे टीचर्स ने समझाया और मेरा हौसला बढ़ाया”।
पढ़ाई को नहीं समझें बोझ 
 मेरा मानना है कि कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझना चाहिए क्योंकि ऐसा सोचने से व्यक्ति कभी भी सफलता हासिल नहीं कर पाएगा। मैंने भी हमेशा पढ़ाई को एन्जॉय किया और आज परिणाम मेरे सामने है।
 
समस्या आने पर टीचर्स से सम्पर्क करें
 सभी छात्रों के जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं आती रहती हैं। मेरे जीवन में भी आई, लेकिन मैंने इसका समाधान निकाला। मुझे आज जो भी सफलता मिली है उसका कारण मेरे माता-पिता और मेरे शिक्षक हैं। मैं जब घर पर रहता तो शिक्षक से फोन पर पूछता और समस्याओं का समाधान पा लेता। मुझे क्रिकेट और बैडमिंटन खेलने का बहुत शौक है और अक्सर पिता के साथ खेला करता हूं।
हैरत की बात यह है कि आजकल के युवा पढ़ाई की जगह अपने शौक को प्राथमिकता देते हैं। महंगे मोबाइल रखने और सोशल साइट्स पर अपना समय बर्बाद करते हैं। वहीं कल्पित लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जिसने सीमित साधन होते हुए भी जे.ई.ई. मेन परीक्षा 2017 में टॉप का स्थान पाया है। कल्पित का कहना है कि किसी भी टेक्नोलॉजी का प्रयोग उतना ही करना चाहिए जितनी उसकी जरूरत है। कल्पित ने इस सफलता के लिए माता—पिता एवं शिक्षकों का धन्यवाद किया है। ‘‘हम ये मानते हैं कि ये सफलता के गुर आप सभी को प्रेरित और प्रोत्साहित ज़रूर करेंगे।’’

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