साहित्य

दिन में तोड़ो, रात में जोड़ो (व्यंग्य)

परसों शर्मा जी के घर गया, तो चाय के साथ बढ़िया मिठाई और नमकीन भी खाने को मिली। पता लगा कि उनका दूर का एक भतीजा राजुल विवाह के बाद यहां आया हुआ है। मैंने उसके कामधाम के बारे में पूछा, तो शर्मा जी ने उसे बुलवाकर मेरा परिचय करा दिया। – क्यों बेटा राजुल, तुम आजकल काम क्या कर ...

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स्वर्ग में विकास का धुआं (व्यंग्य)

भगवान को कल रात दुनिया के अनगिनत पंगे निबटाते बहुत देर हो गई। नींद भी देर से आई, थकावट के कारण आज सुबह थोड़ा लेट उठना चाहते थे, मगर पत्नी आई बोली उठिए श्रीमानजी हमारे घर के आसपास काला धुंआ फैला हुआ है जिसके कारण आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ़ है और आंखों से पानी भी निकलने वाला ...

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आधुनिक काल की मीराबाई भी कहा जाता है महादेवी वर्मा को

प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा की गिनती हिंदी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साथ की जाती है। होली के दिन 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फ़र्रूख़ाबाद में जन्मीं महादेवी वर्मा को आधुनिक काल की मीराबाई कहा जाता है। वह कवयित्री होने के साथ एक विशिष्ट गद्यकार भी ...

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चुड़ैल (पंजाबी कहानी)

भागवंती को अपने घर के पास की फैक्ट्री में काम करते हुए एक साल से अधिक बीत गया था, और हर शुक्रवार को जब पचास पौंड से भरा लिफाफा वह प्रीतम सिंह की हथेली पर रख देती तो वह खुशी से उछल पड़ता था। भाई प्रीतम सिंह के लिए सचमुच यह अच्छा अनुभव था। हर समय उसका चेहरा खुश से खिला ...

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